🌼चर्म रोग (दाग, छाजन, खुजली)
दाग-धब्बे, छाजन (एक्ज़िमा), खाज-खुजली व बार-बार उभरने वाली त्वचा की शिकायतें।
त्वचा भीतर की स्थिति का आईना है; इसलिए ऊपरी मरहम के बजाय रोगी की पूरी प्रकृति देखकर मूल कारण पर उपचार किया जाता है।
🌿मस्से (Warts)
शरीर के किसी भी भाग पर छोटे-बड़े मस्से।
बिना चीर-फाड़, दवाओं द्वारा सौम्य उपचार किया जाता है, जिससे मस्से जड़ से हटने का प्रयास होता है।
🫧पित्ती (शीतपित्त)
शरीर पर अचानक उभरने वाले लाल चकत्ते व खुजली।
ठंड, धूप या किसी खाद्य पदार्थ से भड़कने वाली पित्ती में रोगी की संवेदनशीलता समझकर सौम्य उपचार किया जाता है।
👣गोखरू / कॉर्न
पैर के तलवे में कठोर, दर्दभरी गाँठ।
जिससे चलने में दर्द होता है; मूल कारण पर केंद्रित होम्योपैथिक उपचार से आराम का प्रयास किया जाता है।
🩹बिवाई (फटी एड़ियाँ)
सर्दियों में फटी, दर्दभरी एड़ियाँ।
सूखी त्वचा व ठंड से एड़ियाँ फट जाती हैं; भीतरी प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है, केवल ऊपरी नहीं।
❄️चिलब्लेन्स (ठंड से सूजन)
ठंड से हाथ-पैर की उँगलियों में सूजन, लाली व खुजली।
सर्दियों में बार-बार होने वाली इस शिकायत में रोगी की ठंड-संवेदनशीलता के अनुसार सौम्य दवा दी जाती है।
💅नाखूनों के रोग
नाखूनों का टेढ़ा होना, टूटना, रंग बदलना या फफूँद-संक्रमण।
नाखूनों के रोग अक्सर भीतरी स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं; कारण समझकर धैर्य के साथ उपचार किया जाता है।