डॉ. नरेश कुमार गुप्ताडॉ. नरेशप्रमाणित होम्योपैथिक चिकित्सक

मुखपृष्ठ रोग व उपचार

रोग व उपचार

डॉक्टर साहब को जिन रोगों के उपचार का विशेष अनुभव है, उन्हें श्रेणी के अनुसार यहाँ संजोया गया है। नीचे से अपनी श्रेणी चुनें।

दर्द, हड्डी व जोड़

एड़ी एवं तलवे का दर्द

तलवे में सुई जैसी चुभन व तेज़ दर्द (प्लांटर फ़ेशिआइटिस / कैल्केनियल स्पर)।

सुबह ज़मीन पर पैर रखते ही असहनीय पीड़ा इसकी पहचान है। डॉक्टर साहब को इस समस्या के उपचार का विशेष रूप से लंबा अनुभव है; यह उनके क्लिनिक की सबसे आम शिकायतों में से एक है।

सर्वाइकल (गर्दन का दर्द)

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से गर्दन की जकड़न, दर्द व हाथों में झनझनाहट।

लगातार झुककर काम करने या मोबाइल-कंप्यूटर के अधिक उपयोग से यह समस्या बढ़ती है। रोगी की प्रकृति के अनुसार सौम्य होम्योपैथिक उपचार किया जाता है।

साइटिका

कमर से पैर तक जाने वाली नस का दर्द (साइटिका)।

बैठने-उठने, झुकने या खाँसने पर दर्द बढ़ सकता है और पैर में झनझनाहट होती है। मूल कारण समझकर उपचार पर ज़ोर दिया जाता है।

कमर दर्द

पुराना कमर दर्द जो उठने-बैठने व झुकने में तकलीफ़ देता है।

गलत मुद्रा, भारी वज़न उठाने या लंबे समय बैठे रहने से कमर दर्द पुराना हो जाता है। नियमित होम्योपैथिक उपचार व सही दिनचर्या से राहत का प्रयास किया जाता है।

पुराना सिरदर्द

वर्षों पुराना सिरदर्द व माइग्रेन जैसी बार-बार लौटने वाली पीड़ा।

सिरदर्द का समय, स्थान और कारण (तनाव, नींद, पाचन) समझकर दवा चुनी जाती है, ताकि केवल दर्द दबाने के बजाय उसका बार-बार लौटना कम हो।

त्वचा रोग

चर्म रोग (दाग, छाजन, खुजली)

दाग-धब्बे, छाजन (एक्ज़िमा), खाज-खुजली व बार-बार उभरने वाली त्वचा की शिकायतें।

त्वचा भीतर की स्थिति का आईना है; इसलिए ऊपरी मरहम के बजाय रोगी की पूरी प्रकृति देखकर मूल कारण पर उपचार किया जाता है।

मस्से (Warts)

शरीर के किसी भी भाग पर छोटे-बड़े मस्से।

बिना चीर-फाड़, दवाओं द्वारा सौम्य उपचार किया जाता है, जिससे मस्से जड़ से हटने का प्रयास होता है।

पित्ती (शीतपित्त)

शरीर पर अचानक उभरने वाले लाल चकत्ते व खुजली।

ठंड, धूप या किसी खाद्य पदार्थ से भड़कने वाली पित्ती में रोगी की संवेदनशीलता समझकर सौम्य उपचार किया जाता है।

गोखरू / कॉर्न

पैर के तलवे में कठोर, दर्दभरी गाँठ।

जिससे चलने में दर्द होता है; मूल कारण पर केंद्रित होम्योपैथिक उपचार से आराम का प्रयास किया जाता है।

बिवाई (फटी एड़ियाँ)

सर्दियों में फटी, दर्दभरी एड़ियाँ।

सूखी त्वचा व ठंड से एड़ियाँ फट जाती हैं; भीतरी प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है, केवल ऊपरी नहीं।

चिलब्लेन्स (ठंड से सूजन)

ठंड से हाथ-पैर की उँगलियों में सूजन, लाली व खुजली।

सर्दियों में बार-बार होने वाली इस शिकायत में रोगी की ठंड-संवेदनशीलता के अनुसार सौम्य दवा दी जाती है।

नाखूनों के रोग

नाखूनों का टेढ़ा होना, टूटना, रंग बदलना या फफूँद-संक्रमण।

नाखूनों के रोग अक्सर भीतरी स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं; कारण समझकर धैर्य के साथ उपचार किया जाता है।

कान, नाक व गला

कान बहना

बच्चों व बड़ों में कान से पानी या मवाद बहना।

पुरानी शिकायत का मूल कारण समझकर उपचार किया जाता है, ताकि बार-बार बहना रुके।

कान से आवाज़ आना

कान में सीटी, घंटी या भनभनाहट जैसी आवाज़ आना।

कान से आवाज़ आने की शिकायत कई कारणों से होती है; रोगी की पूरी स्थिति देखकर सौम्य उपचार किया जाता है।

नाक का मस्सा (नेज़ल पॉलिप)

नाक के अंदर मांस का बढ़ना, जिससे साँस लेने में रुकावट।

बिना ऑपरेशन, दवाओं द्वारा पॉलिप घटाने और बार-बार बनने से रोकने का प्रयास किया जाता है।

टॉन्सिल

गले के टॉन्सिल का बार-बार सूजना, दर्द व बुखार, विशेषकर बच्चों में।

बार-बार टॉन्सिल बढ़ने पर बिना ऑपरेशन, होम्योपैथिक दवाओं से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

मुँह के छाले

मुँह व जीभ पर बार-बार होने वाले दर्दभरे छाले।

पेट की गर्मी, कब्ज़ या कमज़ोरी से जुड़े छालों में मूल कारण पर काम किया जाता है, ताकि बार-बार न हों।

पुरुष एवं महिला रोग

बवासीर (Piles)

खूनी एवं बादी बवासीर।

बिना ऑपरेशन, दवाओं द्वारा राहत का प्रयास किया जाता है; साथ ही क़ब्ज़ जैसी जड़ पर भी काम होता है। दशकों का अनुभव।

हाइड्रोसील (Hydrocele)

अंडकोष में पानी भरने की समस्या।

बिना ऑपरेशन, होम्योपैथिक दवाओं से उपचार का लंबा अनुभव।

बांझपन (संतान-प्राप्ति में कठिनाई)

संतान-प्राप्ति में कठिनाई पर परामर्श एवं मार्गदर्शन।

दंपती की पूरी स्थिति को समझकर, धैर्य एवं पूर्ण गोपनीयता के साथ परामर्श दिया जाता है। किसी भी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

गुप्त एवं मूत्र-सम्बन्धी रोग

पुरुषों एवं महिलाओं की गुप्त व मूत्र-सम्बन्धी शिकायतों में गोपनीय परामर्श।

संकोच छोड़कर संपर्क करें; हर बात पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और सम्मान के साथ परामर्श दिया जाता है।

सामान्य एवं बाल रोग

तेज़ एवं बार-बार आने वाला बुखार

तेज़ी से चढ़ने व बार-बार लौटने वाला बुखार।

बुखार का कारण समझकर संतुलित होम्योपैथिक चिकित्सा की जाती है।

एलर्जी (Allergy)

धूल, धूप, मौसम या खान-पान से होने वाली एलर्जी।

त्वचा पर चकत्ते, खुजली, बार-बार छींकें व ज़ुकाम में रोगी की संवेदनशीलता के अनुसार सौम्य उपचार।

चक्कर आना (सिर चकराना)

सिर चकराना, चक्कर आना व संतुलन बिगड़ना।

उठते-बैठते या सिर घुमाते समय चक्कर आने की शिकायत में कारण समझकर सौम्य दवा दी जाती है।

बच्चों का बिस्तर में पेशाब

बच्चों का सोते समय बिस्तर में पेशाब कर देना।

यह प्रायः बढ़ती उम्र के साथ ठीक हो जाता है, पर होम्योपैथिक उपचार व स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन से बच्चे को जल्दी सहायता मिलती है।

जटिल एवं पुरानी बीमारियाँ

वर्षों से चली आ रही जटिल, गंभीर एवं पुरानी बीमारियाँ।

साढ़े चार दशकों के अनुभव से इन बीमारियों के प्रबंधन में गहरी समझ।

परिवार की संपूर्ण चिकित्सा

बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर आयु के लिए सुरक्षित परामर्श।

पूरे परिवार के लिए सौम्य होम्योपैथिक चिकित्सा एक ही छत के नीचे।

यह सूची केवल जानकारी हेतु है। किसी भी रोग की सही दवा परामर्श के बाद ही तय होती है; परिणाम रोगी की स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

अपनी समस्या के बारे में परामर्श लें

डॉ. नरेश कुमार गुप्ता · रामपुर (रोशन बाग़) एवं सेक्टर 14, गुरुग्राम

कॉल करें WhatsApp