वनस्पति जगत से
अधिकांश होम्योपैथिक औषधियाँ पौधों, जड़ी-बूटियों, फूलों और छालों से तैयार की जाती हैं।
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हज़ारों प्रामाणिक औषधियाँ, अनेक रूप, और हर रोगी के लिए अलग चयन। जानिए होम्योपैथिक दवाएँ कैसे बनती हैं और कैसे दी जाती हैं।
होम्योपैथिक औषधि-भंडार (मटेरिया मेडिका) में हज़ारों प्रामाणिक औषधियाँ हैं। एड़ी के दर्द से लेकर वर्षों पुराने जटिल रोगों तक, हर प्रकार की समस्या के लिए अनेक औषधियाँ उपलब्ध हैं। हमारे क्लिनिक में भी सैकड़ों औषधियाँ रहती हैं, जिनमें से रोगी की स्थिति के अनुसार दवा चुनी जाती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि एक ही रोग के दो रोगियों को अलग-अलग दवा दी जा सकती है, क्योंकि होम्योपैथी में दवा रोग के नाम से नहीं, बल्कि रोगी के संपूर्ण लक्षण, प्रकृति और स्वभाव को देखकर चुनी जाती है। इसीलिए हम वेबसाइट पर किसी रोग की "एक निश्चित दवा" नहीं बताते। सही दवा वही है, जो आपको देखकर, समझकर चुनी जाए।

सभी होम्योपैथिक औषधियाँ प्राकृतिक स्रोतों से, होम्योपैथिक फ़ार्माकोपिया के नियमों के अनुसार तैयार की जाती हैं:
अधिकांश होम्योपैथिक औषधियाँ पौधों, जड़ी-बूटियों, फूलों और छालों से तैयार की जाती हैं।
अनेक औषधियाँ प्राकृतिक खनिजों, धातुओं और लवणों से बनाई जाती हैं।
कुछ विशेष औषधियाँ प्राणिज स्रोतों से अत्यंत सूक्ष्म एवं सुरक्षित मात्रा में तैयार होती हैं।
सबसे प्रचलित रूप। दवा की बूँदें मीठी गोलियों पर डालकर दी जाती हैं, जिन्हें बच्चे भी आसानी से ले लेते हैं।
तरल रूप में दवा, जो सीधे या पानी में मिलाकर ली जाती है।
औषधीय पौधों का मूल अर्क, जो कुछ रोगों में बूँदों के रूप में दिया जाता है।
शरीर के आवश्यक लवणों पर आधारित गोलियाँ, जो होम्योपैथी की सहायक पद्धति के रूप में दी जाती हैं।

परामर्श के समय रोग के लक्षणों के साथ-साथ रोगी की दिनचर्या, खान-पान, नींद, स्वभाव और पुरानी बीमारियों को विस्तार से समझा जाता है। इसी संपूर्ण चित्र के आधार पर औषधि और उसकी शक्ति (पोटेंसी) का निर्णय किया जाता है।
यही कारण है कि 51 वर्षों का अनुभव इतना महत्वपूर्ण है। हज़ारों रोगियों को देखने के बाद ही यह समझ विकसित होती है कि किस रोगी को कौन-सी दवा, किस शक्ति में और कब देनी है।
होम्योपैथिक दवा का पूरा लाभ पाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें: